इंडिया गेट में गूंजी आवाज, जाति का हो खात्मा!

नवभारत टाइम्स | Apr 15, 2019

जाति से ना हो पहचान! इस नारे के साथ रविवार को इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकाला गया। ‘यूथ फॉर इक्वैलिटी’ ऑर्गनाइजेशन के इस मार्च में स्टूडेंट्स, एक्टिविस्ट और कई प्रफेशन से जुड़े लोग शामिल हुए। इन लोगों ने मांग कि सरकार एक बिल लाकर जाति को खत्म करे। इसे लेकर जल्द ही यूथ फॉर इक्वैलिटी की ओर से राष्ट्रपति को मेमोरेंडम दिया जाएगा। यूथ फॉर इक्वैलिटी के प्रेजिडेंट डॉ कौशल कांत मिश्रा ने बताया कि दिल्ली समेत यह मार्च देशभर के 153 शहरों के 500 से ज्यादा जगह में रखा गया। हम जाति को खत्म करना चाहते हैं, यही बाबा आंबेडकर का सपना था। हम चाहते हैं कि सरकार कोई भी हो, पार्लियामेंट के दोनों सदन बिल लाए और जाति को खत्म करें।

डॉ कौशल ने बताया, यह हमारे मिशन की शुरुआत है और इसका नाम है ‘मिशन 2020’। अगले एक साल में ऐसे प्रोटेस्ट कई जगह होंगे और फाइनल प्रोटेस्ट 2020 में होगा, जिसमें हम पूरे हिंदुस्तान से 5 करोड़ लोगों को बुलाएंगे। यूथ फॉर इक्वैलिटी इसे आगे बढ़ाएगा, पूरे देश के करीब 250 संगठन इस मिशन पर काम कर रहे हैं।

ऑर्गनाइजेशन जिस बिल की बात कर रहा है, उसका परफॉर्मा भी उसने तैयार किया है। ऑर्गनाइजेशन के प्रेजिडेंट ने बताया, कास्ट एनालिशन एक्ट बिल एमेंडमेंट लेकर आए, जिसका परफॉर्मा हमने तेयार किया है। जो भी लोग गरीब और पिछले हैं, उनके लिए रिजर्वेशन या कोई भी सकारत्मक मदद उनकी जरूरतों के हिसाब से दी जाए।

यूथ फॉर इक्वैलिटी के मेंबर बिनय का कहना है, हम चाहते हैं सरनेम को हटाया जाए। सरकार जो बिल लाए, उसके तहत किसी भी सरकारी डॉक्युमेंट में सरनेम लगाने की इजाजत ना हो। ऐसा इसलिए क्योंकि सरनेम से जाति की पहचान होती है और सारे मसले खड़े होते हैं। जाति के आधार पर ही लोग एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं। मार्च में शामिल हुईं डीयू स्टूडेंट मुस्कान कहती हैं, हम रिर्जेशन के खिलाफ नहीं, बल्कि जातिवाद के खिलाफ हैं। अगर जाति ही नहीं रहेगी, तो जातिवाद भी नहीं होगा। कैँडल के साथ मार्च में बढ़ते रोहित का कहना है कि जाति ही भेदभाव की भावना को खड़ा करना है। हम 21वीं सदी के लोग हैं, तो क्यों जाति का सहारा लें? इस मार्च का हिस्सा बने ग्रेटर नोएडा से इंजिनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स के साथ आए उनके असिस्टेंट प्रफेसर धर्मेँद्र कहते हैं, जातिवाद का सिस्टम कई परेशानी खड़ा रहा है, यह असल तरक्की को रोक रहा है। नई पीढ़ी के बीच तो इसकी कोई जगह ही नहीं होनी चाहिए। यही संदेश देने हम सब इन मार्च में शामिल हुए हैं।

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